विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को* *यश, सुख, ऐश्वर्य, समृद्धि, सफलता, आरोग्य एवं* *सौभाग्य प्राप्त होता है तथा साथ ही मनों की* *प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु के 1000 नाम:~* : *”ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:”* *************************** ॐ विश्वं विष्णु: वटकारो भूत-भव्य-भवत-प्रभु:। भूत-कृत भूत-भृत भावो भूतात्मा भूतभावनः।। 1.. पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमं गतिः।अव्ययः …
*यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणध्यानसमाधयोsष्टावङ्गानि*१.यम ,२.नियम ,३.आसन ,४. प्राणायाम ,५.प्रत्याहार ,६. धारणा७. ध्यान , और८. समाधि ये योग के आठ अंग है। *अहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमाः ।*अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी ना करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (दान ना लेना) ये पांच यम है। *शौचसन्तोषतपःस्वाध्यायेश्वरप्राणिधानानि नियमाः ।*शौच (पवित्रता), सन्तोष, तप, स्वाध्याय, और इश्वरचिन्तन ये पांच नियम हैं । *स्थिरसुखमासनम् ।*जिससे स्थिरता एवं सुख …
पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। ये संख्या में १२ है। सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा ममलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघृष्णेश्वर। हिंदुओं में मान्यता …
भारतीय दर्शन शास्त्रदर्शन-शास्त्र ही हमें प्रमाण और तर्क के सहारे अन्धकार में दीपज्योति प्रदान करके हमारा मार्ग-दर्शन करने में समर्थ होता है। गीता के अनुसार किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः (संसार में करणीय क्या है और अकरणीय क्या है इस विषय में विद्वान भी अच्छी तरह नहीं जान पाते।) परम लक्ष्य एवं पुरुषार्थ की प्राप्ति …
मतंग ऋषि का जीवन परिचय – Matang Rishi Biography वैसे ही त्रेतायुगीय शबरी के गुरु मतङ्ग एवं द्वापरयुगीन महाभारत के मतंग दो भिन्न व्यक्ति है, मतंग ऋषि_आप महातपस्वी, योगी,त्यागी, वीतराग एवं सिद्ध महात्मा थे। हजारों वर्षों तक समाधि में रहते थे। इनकी ख्याति सर्वत्र व्याप्त थी। आप परम् अहिंसा व्रत का पालन करते थे।इनके अहिंसा …
|| सृष्टि रचना [ प्रथम ] || ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना || सृष्टि रचना [ प्रथम ] || अनादि परमात्म तत्त्व ब्रह्म से यह सब कुछ उत्पन्न हुआ | ब्रह्म में स्फुरण हुआ कि ” ऐकोअहम बहु स्याम ” मैं अकेला हूँ , बहुत हो जाऊं | उसकी यह इच्छा ही शक्ति बन …
षोडश संस्कार, संस्कार कितने? गौतम स्मृति शास्त्र में 40 संस्कारों का उल्लेख है। कुछ जगह 48 संस्कार भी बताए गए हैं। महर्षि अंगिरा ने 25 संस्कारों का उल्लेख किया है। वर्तमान में महर्षि वेदव्यास स्मृति शास्त्र के अनुसार, 16 संस्कार प्रचलित हैं, उसके अनुसार षोडश संस्कारसंस्कारों हि नाम संस्कार्यस्य गुणाधानेन वा स्याद्योषाप नयनेन वा ॥-ब्रह्मसूत्र …
आमलकी एकादशी हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में उसी प्रकार श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है जैसा नदियों में गंगा को प्राप्त है और देवों में भगवान …