अष्ट सिद्धियां का उल्लेख मार्कंडेय पुराण तथा ब्रह्मवैवर्तपुराण में प्राप्त होता है। अणिमा लघिमा गरिमा प्राप्ति: प्राकाम्यंमहिमा तथा। ईशित्वं च वशित्वंच सर्वकामावशायिता:।। इन सिद्धियों का नियम होता है, अगर आपने इनका उपयोग अपने लिए किया तो ये समाप्त हो जायेंगी।और एक के बाद एक सिद्धि मिलती है, और जब एक मिल जाती है, तो उसको …
मत्स्य की कहानी क्या है?नारद पुराण में कहा गया है कि राक्षस हयग्रीव (कश्यप और दिति के पुत्र) ने ब्रह्मा के मुख से वेदों को छीन लिया था। तब विष्णु मत्स्य रूप धारण करते हैं और राक्षस को मारकर वेदों को पुनः प्राप्त करते हैं । बताया जा रहा है कि घटना बदरी जंगल की …
गोस्वामी तुलसीदास (1511 – 1623) हिन्दी साहित्य के महान सन्त कवि थे। रामचरितमानस इनका गौरव ग्रन्थ है। इन्हें आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है।तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारम्भ की। दो वर्ष, सात महीने और छ्ब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रन्थ सम्पन्न हुआ।भगवान श्री राम जी से …
भक्ति के बारे में कई ग्रन्थ अपने विचार रखते है। और शिवपुराण में भी भक्ति के बारे में बताया है। शिवपुराणोक्त नवधा भक्ति- शिव उवाच-श्रवणं कीर्तनं चैव स्मरणं सेवनं तथा।दास्यं तथार्चनं देवि वन्दनं ममसर्वदा।।सख्यमात्मार्पणंचेति नवाङ्गानि विदुर्बुधाः।उपाङ्गानिशिवे तस्या बहूनि कथितानि वै।। शिव जी सती से कहते हैं–हे देवि श्रवण, कीर्तन स्मरण सेवन दास्य अर्चन सदा …
अज्ञान क्या है?- माया,अविद्या, अज्ञान अध्यास,विवर्त आदि ब्दो का प्रयोग वेदान्त में पर्यायवाची के रूप में हुआ है।वेदांत वेदांतदर्शन में ब्रह्म को ही जगत की उत्पत्ति ,स्थिति और प्रलय का कारण माना गया है। जन्म के अतिरिक्त इस संसार में कुछ भी नहीं है “सर्व खल्विदं ब्रह्म,नेह नानास्ति किञ्चन ” अर्थात इस जगत में ब्रह्म …
भक्ति के बारे में कई ग्रन्थ अपने विचार रखते है। और शिवपुराण में भी भक्ति के बारे में बताया है।शिवपुराणोक्त नवधा भक्ति- शिव उवाच- श्रवणं कीर्तनं चैव स्मरणं सेवनं तथा।दास्यं तथार्चनं देवि वन्दनं ममसर्वदा।।सख्यमात्मार्पणंचेति नवाङ्गानि विदुर्बुधाः।उपाङ्गानिशिवे तस्या बहूनि कथितानि वै।। शिव जी सती से कहते हैं-हे देवि श्रवण, कीर्तन स्मरण सेवन दास्य अर्चन सदा मेरा …