महापुराण: मुख्य विवरण (Main Purana Facts) पुराणों की संख्या 18 है। परीक्षाओं में इनका क्रम और वर्गीकरण अक्सर पूछा जाता है। 1. पुराणों के लक्षण (Characteristics of Puranas) अमरकोश के अनुसार पुराणों के 5 लक्षण (पंचलक्षण) होते हैं: नोट: श्रीमद्भागवत महापुराण में 10 लक्षणों का वर्णन मिलता है। 2. 18 महापुराणों का वर्गीकरण (Classification) पुराणों …
श्रीमद्भागवत महापुराण (Śrīmad Bhāgavata Mahāpurāṇa) मुख्य विषय: भगवान श्रीकृष्ण की लीला, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य। मूल परिचय (Basic Introduction) विवरण हिन्दी विवरण English Description रचयिता महर्षि वेदव्यास Maharishi Vedavyas वक्ता शुकदेव जी (परीक्षित को) Shukadev Ji (to Parikshit) श्लोक संख्या लगभग 18,000 Approximately 18,000 स्कन्ध 12 12 Cantos (Skandhas) परम्परा वैष्णव भक्ति Vaishnava Bhakti मुख्य …
मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख वैदिक–खगोलीय पर्व है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण का आरंभ होता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है।गीता में वर्णित है—उत्तरायण में देह त्याग करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।पवित्र नदियों में स्नान, दान, जप–तप का विशेष महत्व है। …
श्रीमद्भागवत महापुराण (Śrīmad Bhāgavata Mahāpurāṇa) मुख्य विषय: भगवान श्रीकृष्ण की लीला, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य। मूल परिचय (Basic Introduction) विवरण हिन्दी विवरण English Description रचयिता महर्षि वेदव्यास Maharishi Vedavyas वक्ता शुकदेव जी (परीक्षित को) Shukadev Ji (to Parikshit) श्लोक संख्या लगभग 18,000 Approximately 18,000 स्कन्ध 12 12 Cantos (Skandhas) परम्परा वैष्णव भक्ति Vaishnava Bhakti मुख्य …
हलायुध (समय लगभग १० वीं० शताब्दी ई०) भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषविद्, गणितज्ञ और वैज्ञानिक थे। उन्होने मृतसंजीवनी नामक ग्रन्थ की रचना हलायुध (समय लगभग १० वीं० शताब्दी ई०) भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषविद्, गणितज्ञ और वैज्ञानिक थे। उन्होने मृतसंजीवनी नामक ग्रन्थ की रचना की जो पिंगल के छन्दशास्त्र का भाष्य है। इसमें पास्कल त्रिभुज (मेरु प्रस्तार) …
* चरण-स्पर्श, के क्यों करना चाहिए। चरण-स्पर्श के फायदे, चरण-स्पर्श से क्या होता है।चरण-स्पर्श,* अपने से बड़ों का अभिवादन करने के लिए चरण छूने की परंपरा सदियों से रही है. सनातन धर्म में अपने से बड़े के आदर के लिए चरण स्पर्श उत्तम माना गया है. प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर चरण स्पर्श के कई …
स्वस्तिवाचन स्वस्तिवाचन (स्वस्तयन) मन्त्र और अर्थ– हमारे देश की यह प्राचीन परंपरा रही है कि जब कभी भी हम कोई कार्य प्रारंभ करते है, तो उस समय मंगल की कामना करते है और सबसे पहले मंगल मूर्ति गणेश की प्रार्थना करते है। इसके लिए दो नाम हमारे सामने आते हैं… पहला श्रीगणेश और दूसरा जय गणेश। …
शिवसूत्राणि शिवसूत्राणि In response to my article on Morphological Thoughts and अष्टाध्यायी, one दक्षा-महोदया enquired with me whether I have any write-up on माहेश्वरसूत्राणि. I thank दक्षा-महोदया for motivating this write-up.The title above has the word शिवसूत्राणि. Obviously these are different names.Some people contend that they should be called only माहेश्वरसूत्राणि because they are said …
*जानने योग्य जानकारी*शास्त्रो में बांस की लकड़ी जलाना मना है फिर भी लोग अगरबत्ती जलाते है। जो की बांस की बनी होती है। अगरबत्ती जलाने से पितृदोष लगता है।शास्त्रो में पूजन विधान में कही भी अगरबत्ती का उल्लेख नहीं मिलता सब जगह धुप ही लिखा हुआ मिलता है। अगरबत्ती तो केमिकल से बनाई जाती है …