ग्यारह रुद्रावतार

ग्यारह रुद्रावतारशिव के ग्यारह अवतार- कपाली, पिंगल, भीम,विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शम्भू, चण्ड तथा भव है। इन अवतारों के अतिरिक्त शिव के दुर्वासा, हनुमान, महेश,वृषभ,पिप्पलाद, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, अवधूतेश्वर, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, ब्रह्मचारी, सुनटनतर्क, द्विज, अश्वत्थामा, किरात और नतेश्वर आदि अवतारों का उल्लेख भी ‘शिव पुराण’ में हुआ है।

महाभारत की कथा (Mahabharat story):

महाभारत की कथा (Mahabharat story): महाभारत द्वापरयुग में भाइयों के मध्य सम्पत्ति के लिए लड़ा गया युद्ध था। एक ओर धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र कौरव थे वहीं दूसरी ओर पांडु और कुंती तथा माद्री से उत्पन्न पाँच पुत्र पांडव थे। कौरवों का पक्ष अधर्म का था एवं पांडवों का पक्ष धर्म का कहा …

षड्दर्शन

षड्दर्शनषड्दर्शन का मतलब है छः समीक्षाएँ। इन्हें षट्-शास्त्र भी कहते हैं। षड्दर्शन उन भारतीय दार्शनिक एवं धार्मिक विचारों के मंथन का परिपक्व परिणाम है जो हजारों वर्षो के चिन्तन से उतरा और हिन्दू (वैदिक) दर्शन के नाम से प्रचलित हुआ। इन्हें ‘आस्तिक दर्शन’ भी कहा जाता है। दर्शन और उनके प्रणेता निम्नलिखित है। (१) न्याय …

18 पुराणों के नाम विष्णुपुराण में इस प्रकार है –

18 पुराणों के नाम विष्णुपुराण में इस प्रकार है – ब्रह्मपुराणपद्मपुराणविष्णुपुराणशिवपुराण – वायु पुराणश्रीमद्भावत महापुराण – देवीभागवत पुराणनारदपुराणमार्कण्डेय पुराणअग्निपुराणभविष्यपुराणब्रह्म वैवर्त पुराणलिंगपुराणवाराह पुराणस्कन्द पुराणवामन पुराणकूर्मपुराणमत्स्यपुराणगरुड़पुराणब्रह्माण्ड पुराण

हिन्दू धर्म किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रवर्तित धर्म नहीं है। इसका एक आधार वेदादि धर्मग्रन्थ हैं, जिनकी संख्या बहुत बड़ी है। ये सब दो भागों में विभक्त हैं-

हिन्दू धर्म किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रवर्तित धर्म नहीं है। इसका एक आधार वेदादि धर्मग्रन्थ हैं, जिनकी संख्या बहुत बड़ी है। ये सब दो भागों में विभक्त हैं-(१) इस श्रेणी के ग्रन्थ श्रुति कहलाते हैं। ये अपौरुषेय माने जाते हैं। इसमें वेद की चार संहिताओं, ब्राह्मणों, अरण्यकों, उपनिषदों, वेदाङ्ग, सूत्र आदि ग्रन्थों की गणना की …

गुरुकुल से आप क्या समझते हैं?

गुरुकुल से आप क्या समझते हैं? ‘गुरुकुल’ का शाब्दिक अर्थ है ‘गुरु का परिवार’ अथवा ‘गुरु का वंश’। परन्तु यह सदियों से भारतवर्ष में शिक्षासंस्था के अर्थ में व्यवहृत होता रहा है। गुरुकुलों के इतिहास में भारत की शिक्षाव्यवस्था और ज्ञानविज्ञान की रक्षा का इतिहास समाहित है ऐसे विद्यालय जहाँ विद्यार्थी अपने परिवार से दूर गुरु के परिवार का …

श्रीसूक्तं Shri Suktam ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ||1|| अर्थ – हे सर्वज्ञ अग्निदेव ! सुवर्ण के रंग वाली, सोने और चाँदी के हार पहनने वाली, चन्द्रमा के समान प्रसन्नकांति, स्वर्णमयी लक्ष्मीदेवी को मेरे लिये आवाहन करो। तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥2॥ अर्थ – …

What are the 18 types of Puran?

What are the 18 types of Puran? Mahapuranas Brāhma: Brahma Purana, Padma Purana Śaiva: Shiva Purana, Linga Purana Vaiṣṇava: Vishnu Purana, Bhagavata Purana, Skanda Purana, Varaha Purana, Nāradeya Purana, Garuda Purana, Vayu Purana, Varaha Purana, Matsya Purana, Bhavishya Purana, Vāmana Purana, Kūrma Purana, Mārkandeya Purana, Brahmānda Purana 18 PURAN

पूजा में प्रयोग होने वाले कुछ शब्द और उनके अर्थ

पूजा में प्रयोग होने वाले कुछ शब्द और उनके अर्थ। 1. पंचोपचार – गन्ध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने को ‘पंचोपचार’ कहते हैं | 2. पंचामृत – दूध , दही , घृत , मधु { शहद ] तथा शक्कर इनके मिश्रण को ‘पंचामृत’ कहते हैं | 3. पंचगव्य – …

पुराण शब्द का अर्थ क्या है?

पुराण शब्द का अर्थ -नवं भवती ।’ अर्थात प्राचीन होकर भी जो नवीन रहता है, स्कंद पुराण में पुराणों में ‘वेदोंकी आत्मा’ कही गई है। श्रुति एवं स्मृतिके श्चात पुराणो का उच्चारण होता है। धर्मकृत्यके संकल्पमें श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फलप्राप्त्यर्थं’, ऐसा वाक्य आता है। लौकिक संस्कृत साहित्यमें पुराणोंका सर्वोच्च स्थान है ई. पुराण मनुष्य जीवनमें श्रद्धा, दयाभाव …