अष्ट सिद्धियां का उल्लेख मार्कंडेय पुराण तथा ब्रह्मवैवर्तपुराण में प्राप्त होता है।

अष्ट सिद्धियां का उल्लेख मार्कंडेय पुराण तथा ब्रह्मवैवर्तपुराण में प्राप्त होता है। अणिमा लघिमा गरिमा प्राप्ति: प्राकाम्यंमहिमा तथा। ईशित्वं च वशित्वंच  सर्वकामावशायिता:।। इन सिद्धियों का नियम होता है, अगर आपने इनका उपयोग अपने लिए किया तो ये समाप्त हो जायेंगी।और एक के बाद एक सिद्धि मिलती है, और जब एक मिल जाती है, तो उसको …

सीताया कृतं अग्निस्तोत्रम् सीता उवाच

सीताया कृतं अग्निस्तोत्रम् सीता उवाच -उपतस्थे महायोगं सर्वदोषविनाशनम् ।कृताञ्जली रामपत्नी साक्षात्पतिमिवाच्युतम् ॥ १॥ नमस्यामि महायोगं कृतान्तं गहनं परम् ।दाहकं सर्वभूतानामीशानं कालरूपिणम् ॥ २॥ नमस्ये पावकं देवं शाश्वतं विश्वतोमुखम् ।योगिनं कृत्तिवसनं भूतेशं परमम्पदम् ॥ ३॥ आत्मानं दीप्तवपुषं सर्वभूतहृदि स्थितम् ।तं प्रपद्ये जगन्मूर्त्तिं प्रभवं सर्वतेजसाम् ।महायोगेश्वरं वह्निमादित्यं परमेष्ठिनम्। ४॥ प्रपद्ये शरणं रुद्रं महाग्रासं त्रिशूलिनम् ।कालाग्निं योगिनामीशं भोगमोक्षफलप्रदम् …

मत्स्य की कहानी क्या है

मत्स्य की कहानी क्या है?नारद पुराण में कहा गया है कि राक्षस हयग्रीव (कश्यप और दिति के पुत्र) ने ब्रह्मा के मुख से वेदों को छीन लिया था। तब विष्णु मत्स्य रूप धारण करते हैं और राक्षस को मारकर वेदों को पुनः प्राप्त करते हैं । बताया जा रहा है कि घटना बदरी जंगल की …

गोस्वामी तुलसीदास (1511 – 1623) हिन्दी साहित्य के महान सन्त कवि थे।

गोस्वामी तुलसीदास (1511 – 1623) हिन्दी साहित्य के महान सन्त कवि थे। रामचरितमानस इनका गौरव ग्रन्थ है। इन्हें आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है।तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारम्भ की। दो वर्ष, सात महीने और छ्ब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रन्थ सम्पन्न हुआ।भगवान श्री राम जी से …

प्रतिदिन प्रातः स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह*

*प्रतिदिन प्रातः स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह* * प्रात: कर-दर्शनम्*कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती।करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥ *पृथ्वी क्षमा प्रार्थना*समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते।विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥*त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण*ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥ * स्नान मन्त्र *गंगे च यमुने चैव गोदावरी …

भक्ति के बारे में कई ग्रन्थ अपने विचार रखते है। और शिवपुराण में भी भक्ति के बारे में बताया है।

  भक्ति के बारे में कई ग्रन्थ अपने विचार रखते है। और शिवपुराण में भी भक्ति के बारे में बताया है। शिवपुराणोक्त नवधा भक्ति- शिव उवाच-श्रवणं कीर्तनं चैव स्मरणं सेवनं तथा।दास्यं तथार्चनं देवि वन्दनं ममसर्वदा।।सख्यमात्मार्पणंचेति नवाङ्गानि विदुर्बुधाः।उपाङ्गानिशिवे तस्या बहूनि कथितानि वै।। शिव जी सती से कहते हैं–हे देवि श्रवण, कीर्तन स्मरण सेवन दास्य अर्चन सदा …

अज्ञान क्या है?

अज्ञान क्या है?- माया,अविद्या, अज्ञान अध्यास,विवर्त आदि ब्दो का प्रयोग वेदान्त में पर्यायवाची के रूप में हुआ है।वेदांत वेदांतदर्शन में ब्रह्म को ही जगत की उत्पत्ति ,स्थिति और प्रलय का कारण माना गया है। जन्म के अतिरिक्त इस संसार में कुछ भी नहीं है “सर्व खल्विदं ब्रह्म,नेह नानास्ति किञ्चन ” अर्थात इस जगत में ब्रह्म …

श्रीरामचरितमानस बालकाण्डश्लोक :

श्रीरामचरितमानस बालकाण्डश्लोक : *वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥ *भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्‌॥2॥ वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्‌।यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥3॥ ॥सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥4॥ उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्‌।सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्‌॥5॥ यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरायत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतांवन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्‌॥6॥नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।स्वान्तःसुखाय तुलसी …

श्रीरामचरितमानस बालकाण्डश्लोक :

श्रीरामचरितमानस बालकाण्डश्लोक : *वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥ *भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्‌॥2॥ वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्‌। यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥3॥॥ सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥4॥ उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्‌। सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्‌॥5॥ यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरायत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः। यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतांवन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्‌॥6॥ नानापुराणनिगमागमसम्मतं …

भक्ति के बारे में कई ग्रन्थ अपने विचार रखते है। और शिवपुराण में भी भक्ति के बारे में बताया है।शिवपुराणोक्त नवधा भक्ति

भक्ति के बारे में कई ग्रन्थ अपने विचार रखते है। और शिवपुराण में भी भक्ति के बारे में बताया है।शिवपुराणोक्त नवधा भक्ति- शिव उवाच- श्रवणं कीर्तनं चैव स्मरणं सेवनं तथा।दास्यं तथार्चनं देवि वन्दनं ममसर्वदा।।सख्यमात्मार्पणंचेति नवाङ्गानि विदुर्बुधाः।उपाङ्गानिशिवे तस्या बहूनि कथितानि वै।। शिव जी सती से कहते हैं-हे देवि श्रवण, कीर्तन स्मरण सेवन दास्य अर्चन सदा मेरा …