वसंत पंचमी सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा और वीणावादिनी सहित अनेक नामों से संबोधित जाता है। ये सभी प्रकार के ब्रह्म विद्या-बुद्धि एवं वाक् प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की अधिष्ठात्री देवी भी हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-। ये शुक्लवर्ण, शुक्लाम्बरा, वीणा-पुस्तक-धारिणी तथा …
सनातन धर्म में सूर्य की पूजा की परंपरा काफी पुरानी है। वैसे तो रोजाना ही ज्यादातर लोग स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं लेकिन रविवार सूर्य देवता का दिन होता है। इसका अर्थ यह है कि रविवार को विशेषरुप से सूर्यदेव की ही पूजा की जाती है। नारद पुराण में लिखा …
भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र नामक ग्रंथ लिखा । इनका समय विवादास्पद है। इन्हें 400 ई॰पू॰ 100 ई॰ सन् के बीच किसी समय का माना जाता है। भरत बड़े प्रतिभाशाली थे। इतना स्पष्ट है कि भरतमुनि नाट्यशास्त्र के गहन जानकार और विद्वान थे । इनके द्वारा रचित ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ भारतीय नाट्य और काव्यशास्त्र का आदिग्रन्थ है। इसमें …
12 ज्योतिर्लिंग कहां–कहां है पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देशभर के 12 स्थानों पर जो शिवलिंग मौजूद हैं उनमें ज्योति के रूप में स्वयं भगवान शिव विराजमान हैं इसलिए इन्हें ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है. 1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, गुजरातगुजरात के सौराष्ट्र में अरब सागर के तट पर स्थित है देश का पहला …
हनुमान जयंती एक हिन्दू पर्व है। यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ माना जाता है।हनुमान जी को कलयुग में सबसे प्रभावशाली देवताओं में से एक माना जाता है।
प्रथमं शैलपुत्री ‘शैलपुत्री’ देवी का पहला रूपहिमालय की अधिष्ठात्री प्रकृति नवरात्र चाहे वासन्तिक हो या शारदीय दोनों में प्रकृति परमेश्वरी के नौ रूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। दुर्गाकवच के अनुसार देवी के नौ रूप हैं-1.शैलपुत्री,2.ब्रह्मचारिणी, 3.चन्द्रघण्टा, कुष्माण्डा,5. स्कन्दमाता,6.कात्यायनी,7.कालरात्रि, 8.महागौरी व 9.सिद्धिदात्री परावेदविज्ञान paravedvigyan