दशहरा -विजयादशमी 

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशहरा अथवा …

पंचांग की आठवीं तिथि को अष्टमी कहते हैं।

पंचांग की आठवीं तिथि को अष्टमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है: एक पूर्णिमा होने पर और दूसरी अमावस्या होने पर। पूर्णिमा के पीछे से आने वाली अष्टमी को कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या के उपरांत आने वाली अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी कहते हैं। अष्टमी कौन सी माता …

वेदो में सृष्टि का वर्णन कहाँ से मिलता है

वेदो में सृष्टि का वर्णन कहाँ से मिलता है वेद, भारतीय धर्म और दर्शन के प्राचीन ग्रंथ हैं, और वे सृष्टि (सृजन) और ब्रह्म (ब्रह्मांडीय वास्तविकता) के विषय में व्यापक रूप से विचार करते हैं। सृष्टि और ब्राह्मण का वर्ण वेदों के भिन्न अंशों में मिलता है। ऋग्वेद: ऋग्वेद, सृष्टि के प्रथम स्रोत के रूप …

माँ शैलपुत्री

नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। माघ, चैत्र, आषाढ, …

महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् – अयि गिरिनन्दिनि (Mahishasura Mardini Stotram – Aigiri Nandini)

महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् – अयि गिरिनन्दिनि  (Mahishasura Mardini Stotram – Aigiri Nandini)  अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरतेत्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरतेदनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरतेशिखरि …

शैलपुत्री  • ब्रह्मचारिणी  • चन्द्रघंटा  • कुष्मांडा  • स्कंधमाता  • कात्यायिनी  • कालरात्रि  • महागौरी  • सिद्धिदात्रीनवार्ण मंत्र:॥ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुडायै विच्चे॥

शैलपुत्री  • ब्रह्मचारिणी  • चन्द्रघंटा  • कुष्मांडा  • स्कंधमाता  • कात्यायिनी  • कालरात्रि  • महागौरी  • सिद्धिदात्रीनवार्ण मंत्र:॥ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुडायै विच्चे॥  1. शैलपुत्री- सम्पूर्ण जड़ पदार्थ अथवा अपरा प्रकृति से उत्पन्न यह भगवती का पहला स्वरूप हैं। मिट्टी(पत्थर), जल, वायु, अग्नि व आकाश इन पंच तत्वों पर ही निर्भर रहने वाले जीव शैल पुत्री का प्रथम रूप हैं। इस पूजन का अर्थ है प्रत्येक जड़ पदार्थ अर्थात कण-कण में परमात्मा के प्रकटीकरण का …

9 माताओं का नाम क्या है

9 माताओं का नाम क्या है? इन नौं दिनों तक भक्त मां दुर्गा के नौं स्वरुपों का पूजन करते हैं। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी, चतुर्थ मां चंद्रघंटा, पंचम स्कंद माता, षष्टम मां कात्यायनी, सप्तम मां कालरात्रि, अष्टम मां महागौरी, नवम मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति …

शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से, इस शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना

शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से, इस शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना यह नौ दिनों का एक त्योहार है जो मां के शक्तिस्वरूप की आराधना करते हुए मनाया जाता है। पूरे भारत में नवरात्रि का पहला दिन बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि या महा नवरात्रि  अश्विन महीने में आती …

वेद का सामान्य परिचय*

#ऋग्वेद का सामान्य परिचय* (१) *ऋग्वेद की शाखा :-* महर्षि #पतञ्जलि के अनुसार ऋग्वेद की २१ #शाखाएँ हैं, किन्तु #पाँच ही शाखाओं के नाम उपलब्ध होते हैं :— (१) #शाकल (२) #बाष्कल (३) #आश्वलायन (४) #शांखायन (५) #माण्डूकायन संप्रति केवल शाकल शाखा ही उपलब्ध है ! ऋग्वेद के #ब्राह्मण (१) #ऐतरेय ब्राह्मण (२) #शांखायन ब्राह्मण …