श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!

 मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥ समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।मनस्करं नमस्कृतां …

Chanakya Slokas (चाणक्य नीति श्लोक)

Chanakya Slokas (चाणक्य नीति श्लोक) कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित् रिपु:। अर्थतस्तु निबध्यन्ते, मित्राणि रिपवस्तथा ॥  भावार्थ : न कोई किसी का मित्र है और न ही शत्रु, कार्यवश ही लोग मित्र और शत्रु बनते हैं । मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च। दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति॥  भावार्थ : मूर्ख शिष्य को पढ़ाने पर , दुष्ट स्त्री के साथ जीवन बिताने पर तथा दुःखियों- …

Sanskrit Slokas – संस्कृत श्लोक

विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥  भावार्थ : विद्या से विनय (नम्रता) आती है, विनय से पात्रता (सजनता) आती है पात्रता से धन की प्राप्ति होती है, धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है । अलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम् । अधनस्य कुतो मित्रममित्रस्य कुतः सुखम् ॥  …

 ‘दर्शन’ शब्द का अर्थ-भारतीय दर्शन का विषय

 ‘दर्शन’ शब्द का अर्थ पाणिनीय व्याकरण के अनुसार ‘दर्शन’ शब्द, ‘दृशिर् प्रेक्षणे’ धातु से ल्युट् प्रत्यय करने से निष्पन्न होता है। अतएव दर्शन शब्द का अर्थ दृष्टि या देखना, ‘जिसके द्वारा देखा जाय’ या ‘जिसमें देखा जाय’ होगा। दर्शन शब्द का शब्दार्थ केवल देखना या सामान्य देखना ही नहीं है। इसीलिए पाणिनि ने धात्वर्थ में …

राधाष्टमी

 श्री राधाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ सनातन धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि श्री राधाष्टमी के नाम से प्रसिद्ध है। शास्त्रों में इस तिथि को श्री राधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। श्री राधाजी वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थीं। वेद तथा पुराणादि में जिनका ‘कृष्ण वल्लभा’ कहकर गुणगान …

गरुड़ पुराण का रहस्य क्या है?

गरुड़ पुराण ग्रंथ में भगवान विष्णु अपने पक्षी गरुड़ राज को इस बारे में बारे में बताते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार मरणोपरांत व्यक्ति का अगला जन्म किस रूप में होगा, यह उसके द्वारा जीवनकाल में किए कर्मों के आधार पर निश्चित होता है. इस अर्थ यह है कि अगले जन्म का रहस्य आपको इसी …

उपपुराण 

उपपुराण  उपपुराण छोटे या सहायक ग्रंथ हैं: कभी-कभी इन्हें संख्या में अठारह भी कहा जाता है , विहित शीर्षकों के संबंध में और भी कम सहमति है। कुछ को आलोचनात्मक रूप से संपादित किया गया है। उनमें शामिल हैं: सनत-कुमार, नरसिम्हा, बृहन्-नारदीय, शिव-रहस्य, दुर्वासा, कपिला, वामन, भार्गव, वरुण, कालिका, सांबा, नंदी, सूर्य, पराशर, वशिष्ठ, देवी-भागवत, गणेश, मुद्गला और हम्सा।  …

कई ग्रंथों में से सबसे महत्वपूर्ण महापुराण हैं

पुराण की संख्या हमेशा अठारह होती है, जो छह-छह के तीन समूहों में विभाजित हैं। अग्नि पुराण (15,400 श्लोक)भागवत पुराण (18,000 श्लोक)। सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय पुराणों में से एक जिसमें विष्णु के दस अवतारों के बारे में बताया गया है। इसका दसवां और सबसे लंबा सर्ग कृष्ण के कार्यों का वर्णन करता है, उनके …

सबसे बड़ा पुराण कौन सा है?

(१३) स्कन्दपुराण : यह पुराण शिव के पुत्र स्कन्द (कार्तिकेय, सुब्रह्मण्य) के नाम पर है। यह सबसे बडा पुराण है। इसमें कुल ८१,००० श्लोक हैं।

18 पुराणों के नाम कौन कौन से हैं?

18 पुराणों के नाम कौन कौन से हैं?इनके नाम कुछ इस प्रकार हैं: ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण, भागवत पुराण, नारद पुराण, मार्कण्डेय पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, लिङ्ग पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण